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Jio Phone’s manipulative launch

Jio Feature Phone is launched and everyone is going gaga about it. I also watched the entire presentation, but noticed many discrepancies during the demo. I was surprised when no news item or YouTube channels covering this event were pointing about these obvious manipulative tactics. So, I decided to put this article showing the manipulative launch in detail.

I am not going to cover the specs or details around the phone, as by now everyone has covered that already. So, let’s get straight to point, on the demo.
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ऑफलाइन

“आप अपने प्रोफ़ाइल पर अपनी फोटो क्यों नहीं लगाते है?"
सुजाता अपनी सहेली की बात से डर गई थी। उसने अपनी खुद की कहानी बताई थी, कि कैसे उसे भी किसी अंजान व्यक्ति से सोशल मीडिया पर मित्रता हो गई थी, और बाद में उसने इसे ब्लैकमेल करने की कोशिश की थी। उसका घर उजड़ते उजड़ते रह गया था। उसके चाचा जी पुलिस में है, और उनकी वजह से वह उस ब्लैकमैलर के शिकंजे से बची थी। 

आज तीन महीने से वह राहुल से ऑनलाइन बाते करती थी। दोनों ने एक दूसरे की तस्वीर भी नहीं देखी थी। बस मोबाइल पर लिख कर बातें होती रहती। शादी के 15 वर्ष बाद उसे कोई ऐसा मिला था जिसके साथ वह एक बार फिर दिल खोल कर बाते कर सकती थी। दोनों की पसंद एक जैसी थी, और जितना कुछ उन्होंने एक दूसरे को बताया था, उसके अनुसार दोनों की जिंदगी भी एक जैसी थी। शादी के बाद लगभग 3-4 वर्षों तक वह अपने पति मनोज के साथ बहुत खुश थी। दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे, साथ घूमना फिरना, घंटों तक बाते करते रहना, एक दूसरे को अच्छे से समझना; ऐसा लगता था मानो दोनों एक दूसरे के पूरक है। पर बाद में पता नहीं किसकी नजर लग गई, मनोज धीरे धीरे अपनी नौकरी में व्यस्त होते चले …

चीर हरण

“सखी, आज इतनी उदास क्यों बैठी हो?” कृष्ण ने द्रोपदी के समीप बैठते हुए प्रश्न किया। 
“सखा, आप सर्वत्र ज्ञाता है, फिर भी क्यों पूछते है?”, दुखित स्वर में द्रोपदी ने उत्तर दिया। कृष्ण के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान दौड़ गई। उन्होंने अपने दोनों हाथों से द्रोपदी के चेहरे हो थामा और स्नेह पूर्वक कहा, “यदि बात करोगी तो शायद मन हल्का हो जाए, इसलिए पूछा है।”
“आपको नहीं लगता की मृत्युलोक में आज भी औरतों को अपना सम्मान नहीं मिला है? आज भी उन्हें प्रताड़ित एवं अपमानित किया जाता है। पुरुष वर्ग आज भी या तो दुशाशन बनकर चीर हरण करता है, या फिर भीष्म पितामह की तरह चुप चाप देखता रहता है। मेरी रक्षा को तो आप आ गए थे, पर अब इन्हें कोई क्यों नहीं बचाता? क्या इनकी रक्षा आपका दायित्व नहीं है? क्या इतिहास में कृष्ण सिर्फ एक द्रोपदी की लाज बचाने के लिए याद किए जाएंगे? जबकि आज हजारों लाखों द्रोपदीयां अपनी लाज बचाने की नाकाम कोशिश कर रही है। हर दिन सकड़ों द्रोपदी चीर हरण का शिकार होती है। क्या जगत नारायण श्री कृष्ण का उनके प्रति कोई दायित्व नहीं है? क्या उनकी नियति में चीर हरण ही लिखा है?”, कहते कहते द्रोपदी का चेह…

अंतर्द्वंद

“मैं जा रही हूँ”, कहते हुए उसने उठने का उपक्रम किया। मैंने हिम्मत करके उसकी कलाई पकड़ ली। हमारे 2 वर्ष पुराने रिश्ते में मैंने पहली बार उसकी कलाई पकड़ी थी। वह एकबारगी चौक गई, और जल्दी से अपना हाथ छुड़ा लिया। “क्या करते हो? कोई देख लेगा तो?”, उसकी आवाज़ में स्पष्ट कंपन था। 
“मुझे किसी की परवाह नहीं है। मैं तुम्हें इस तरह जाने नहीं दूंगा। चलो मेरे साथ कलकत्ता चलो।“ मैंने भी अपनी कांपती आवाज़ में कहा। ऊपर से मैं बहुत हिम्मत दिखा रहा था, परंतु अंदर ही अंदर एक द्वंद्व चल रहा था। कहा ले जाऊंगा? कैसे रखूँगा? मेरी तो अभी नौकरी भी नहीं लगी है। रहने को अपना घर भी नहीं है, गाव के कुछ लोगों के साथ बासा में रहने वाला उसे कहाँ रखूँगा।

राष्ट्र गान का सम्मान या डर?

कुछ महीनों पूर्व मैं एक बंगला फिल्म “राजकाहिनी” देखने गया था। फिल्म बहुत अच्छी थी, और अब हिन्दी में भी बन रही है। मेरी ओर से सबको हिन्दी वाली फिल्म देखने की सलाह है। पर यह पोस्ट उस फिल्म या उसकी कहानी से संबन्धित नहीं है। उस फिल्म के अंत में हमारे राष्ट्र गान “जन गण मन” का असली बंगला गीत दिखाया गया है। जन गण मन को पहले बंगला में ही लिखा गया था। सिनेमा हाल में जब यह गाना शुरू हुआ, तब किसी को इसके जन गण मन होने का एहसास नहीं था। दरअसल यह गाना “जन गण मन” से शुरू नहीं होता है। दूसरी पंक्ति आते आते लोगों को पता चलने लगा, और असल राष्ट्र गान ना होते हुए भी लोग एक एक करके खड़े होने लगे। फिल्म का अंत बहुत दुखद और चौका देने वाला है। इसलिए गीत को पहचानने में थोड़ी देर लगी, पर 3-4 पंक्तियाँ होते होते सभी खड़े हो चुके थे। मैं खुद भी खड़ा हुआ था। तब सूप्रीम कोर्ट का कानून भी नहीं था और यह असल राष्ट्र गान भी नहीं था। पर पता नहीं क्यों, अंदर से इच्छा हुई खड़े होने की, और इस गीत को सम्मान देने की। भले ही यह असल राष्ट्र गान ना सही, पर अर्थ तो वही थे। 

दंगल : एक पुरुष प्रधान समाज में लड़कियों पर हो रहे अत्याचार की कहानी

दंगल एक बेहतरीन फिल्म है। पूरी कहानी कुश्ती पर आधारित होते हुए भी इमोशन और ड्रामा से भरपूर है। आमिर ने एक बार फिर बाज़ी मार ली है। शायद यह 2016 की सबसे अच्छी फिल्म साबित हो। 
बस इससे आगे मैं इस फिल्म की और तारीफ नहीं कर सकता। अब जो लिख रहा हूँ, वह मेरा अपना विचार है, और उसका फिल्म के मनोरंजक और अच्छे होने से कोई सरोकार नहीं है। मुझे फिल्म की कहानी पसंद नहीं आई। लगभग सबको कहानी के बारे में पता है, इसलिए यहाँ जो मैं लिख रहा हूँ, वह कोई भेद नहीं खोलेगा। कहानी में एक लड़की की विपरीत परिस्थितियों से लड़कर विजेता बनने के सफर को दिखाने की कोशिश की गई है। पर जिस नजरिए से मैंने देखा, मुझे यह एक लड़की की अपनी सफलता से अधिक उसका बलिदान दिखा। यह कहानी स्त्री प्रधान ना होकर पुरुष प्रधान निकली। एक व्यक्ति जो खुद अपने जीवन में सफलता ना पा सका, अपनी जिद के चलते अपने दो बच्चों का बचपन और उनकी इच्छाएं उनसे छीन कर, उनके जीवन को कुर्बान कर देता है। उनकी अपनी पहचान खत्म हो जाती है। हर जगह उन्हें अपनी इच्छाओं को मारना पड़ता है। लोगों के उपहास का पात्र बनना पड़ता है। और यह सब सिर्फ इसलिए कि वह अपने पिता कि जिद के…

PayTM - is this strategic solution for cashless economy?

Mobile Wallet is in thing today with demonetization and PayTM has gained the most acceptance from the cash crunch situation. There are other wallet services in the market, but for some reason, PayTM acceptance is much more than any other. Maybe that happened because they had inside information, or they have used our PM for promotion, I don’t know that. But this post is not about how they got so much acceptance. In fact, I am thankful that they got such wide acceptance as it helped me to go on with my life since demonetization without much of hassle. I have been using PayTM to pay for my Uber ride, for small purchases done at grocery or stationary store; I have even used it once in Pune for Tea on a small roadside vendor as well. I had few incidents which made me realise not to depend on PayTM fully, and this post is all about those incidents. I am not defaming PayTM service, but the idea is to tell you all not to depend “only” on PayTM or any Wallet. You need to keep your options ava…